बच्चे को बीमारियों से बचाता है माँ का दूध : डॉ बंसल



  • जन्म के पहले घंटे का स्तनपान अमृत समान

लखनऊ -  'विश्व स्तनपान सप्ताह’ पिछले 30 वर्षों से विश्व के 170 देशों में मनाया जा रहा है | आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 25-30 प्रतिशत महिलाएं ही प्रसव के एक घंटे के भीतर स्तनपान करा पाती हैं और सिर्फ 50 प्रतिशत महिलाएं ही प्रसव के पहले 6 माह तक अनन्य स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराती हैं | बालरोग विशेषज्ञ डॉ उत्कर्ष बंसल ने वर्ल्ड विज़न इंडिया के साथ मनकामेश्वर वार्ड में माताओं और आशा बहुओं के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया | उन्होंने कहा कि "हर माँ का है ये वरदान, स्तनपान शिशु के लिए अमृतपान" | माँ का दूध शिशु के विकास के लिए सभी पोषक तत्व युक्त, साफ़, हमेशा उपलब्ध, उचित तापमान पर, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने, दिमागी विकास करने और भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाव देने वाला होता है | नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद, एक घंटे के अन्दर माँ का पीला गाढ़ा दूध पिलाना बहुत जरूरी है, इसके कम मात्रा में होने के बावजूद इसमें शिशु के लिए बीमारियों से लड़ने की शक्ति और उचित पोषण होता है |
स्तनपान से माँ को भी लाभ हैं, जन्म के बाद का रक्तस्राव कम होता, वजन जल्दी कम होता, स्तन, गर्भाशय व अंडाशय के कैंसर से बचाता तथा सबसे आवश्यक माँ और शिशु में प्यार का रिश्ता कायम करता है |

छ: माह तक माँ का दूध शिशु की हर ज़रूरत के लिए काफी है और उसे पानी, घुट्टी, शहद या ऊपर का दूध कतई नहीं देना चाहिये | स्तनपान कराते हुए शिशु के सिर और शरीर को सीधा रखते हुए माँ को अपने समीप रखकर पूरे शरीर को सहारा देना चाहिए | शिशु के मुंह में स्तन के निप्पल के चारों ओर का भूरा भाग (अरिओला) भी हो और उसकी ठोड़ी स्तन को छुए | इस तरह वह सही लगाव करने से अच्छे से स्तनपान करेगा |

गर्भावस्था के दौरान जब महिलाएं स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञों के पास जाती हैं, तभी से उन्हें स्तनपान से होने वाले फायदों के बारे में परामर्श देना चाहिए एवं हर बार उनका ब्रेस्ट निरीक्षण करना चाहिए | प्रसव के तुरंत बाद बच्चे को माँ के साथ रखना भी काफी महत्वपूर्ण होता है | इस से माँ के स्तनों में दूध की मात्रा में भी इजाफा होता है | माँ को किसी खास आहार की नहीं, संतुलित आहार की आवश्यकता है | माँ के स्तन के आकार का दूध की मात्रा पर कोई प्रभाव नहीं होता और माँ लेट कर भी दूध पिला सकती है | दूध बढ़ने का सबसे अच्छा उपाय बार-बार और खासकर रात में स्तनपान कराना है, कोई दवा नहीं | एक स्तन से करीब 20 मिनट तक पिलाएं क्योंकि आखिरी का दूध ज्यादा गाढ़ा होता है |

अगर माँ के निप्पल पर कटाव हो जाये तो अपना दूध ही उस पर दवा की तरह लगायें और वक्ष का अतिपूरण हो जाये तो सिकाई करें और दूध को हाथ से निकल दें | सभी माताओं को अपने दूध की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन) सीखना चाहिए | यह एक महत्वपूर्ण क्रिया है जिससे अतिपूरण (एन्गोर्ज्मेंट) से बचा जा सकता है, एवं कामकाजी महिलाएं अपने दूध की अभिव्यक्ति कर 24 घंटे तक इस दूध को साफ़ बर्तन में फ्रिज में या 6-8 घंटे सामान्य तापमान में रख सकती हैं, जिससे बच्चे के रोने या भूखे होने पर घर में मौजूद अन्य लोग उसे यह दूध जरुरतानुसार पिला सकें | एक महिला जिसने कभी स्तनपान न कराया हो, या कभी गर्भवती न हुई हो, और कोई बच्चा गोद लिया हो और उसे स्तनपान कराने में इच्छुक हो, वो भी स्तनपान करा सकती है |

डॉ. उत्कर्ष कहते हैं की ऊपर का दूध और बोतल शिशु के सबसे बड़े शत्रु हैं, ये डायरिया, निमोनिया, कुपोषण, एलर्जी, इत्यादि का प्रमुख कारण हैं | छ: माह के बाद भी स्तनपान कमसेकम 2 वर्ष तक जारी रखते हुए घर का बना पूरक आहार खिलाना आरम्भ कर देना चाहिए | स्तनपान करने वाले बच्चे स्वस्थ रहते हैं और कम बीमार पड़ते हैं | कार्यक्रम का सञ्चालन जीना जी ने किया  |