- डा. सूर्यकान्त ने नर्सिंग ऑफिसर सत्येन्द्र कुमार के सराहनीय एवं प्रेरणादायक कार्य की प्रशंसा की
लखनऊ। विश्व टीबी दिवस समारोह के क्रम में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के नर्सिंग ऑफिसर सत्येन्द्र कुमार (निक्षय मित्र) ने 30टीबी मरीजों को पोषण पोटली प्रदान की। पोषण पोटली में चना, दाल, दलिया, बेसन, मूंगफली, राजमा, सोयाबीन, गुड़, मखाना आदि पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल किए गए, जिससे मरीजों को समुचित पोषण मिल सके। यह पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त की देख रेख में सम्पन्न हुआ।
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. सूर्यकान्त ने नर्सिंग ऑफिसर सत्येन्द्र कुमार के इस सराहनीय एवं प्रेरणादायक प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका यह कदम न केवल टीबी मरीजों के लिए सहारा है, बल्कि समाज में सेवा और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम में निक्षय मित्र सत्येन्द्र कुमार को पोषण पोटली वितरण के अवसर पर उपस्थित प्रमुख अतिथियों श्रीमती अर्चना गहरवार, आईएएस (रजिस्ट्रार, केजीएमयू), डा. बी. के. ओझा (सीएमएस, केजीएमयू) एवं डा. सुरेश कुमार (एमएस, केजीएमयू) द्वारा सम्मानित किया गया तथा उनके इस सराहनीय सामाजिक कार्य के लिए आभार व्यक्त किया गया।
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने अब तक 500 से अधिक टीबी रोगियों को गोद लिया है। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को गोद लेने का कार्यक्रम वर्ष 2023 में प्रारम्भ किया गया, जबकि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने वर्ष 2019 से ही एक गांव एवं एक स्लम क्षेत्र को गोद ले रखा है। केजीएमयू द्वारा अब तक लगभग 15 ग्राम पंचायतों को गोद लिया जा चुका है। विभाग द्वारा गोद लिए गए टीबी रोगियों का उपचार पूर्ण होने के बाद भी लगभग 300 से अधिक मरीज विभाग के संपर्क में रहते हैं। लगभग 50 प्रतिशत टीबी रोगियों में उपचार के बाद भी फेफड़ों एवं सांस से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे उन्हें इलाज बंद होने के बाद भी खांसी, सांस लेने में तकलीफ एवं अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ऐसे पोस्ट टीबी मरीजों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पोस्ट टीबी डिजीज क्लीनिक का संचालन डा. सूर्यकान्त के संरक्षण में प्रारम्भ किया गया है। यहां टीबी रोगियों के लिए शारीरिक व्यायाम, पोषण संबंधी परामर्श एवं समुचित काउंसलिंग के माध्यम से उनकी श्वसन क्षमता, जीवन गुणवत्ता तथा कार्यक्षमता में सुधार लाने का प्रयास किया जाता है। काउंसलिंग के उपरांत उन्हें संतुलित आहार एवं जीवनशैली संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है, ताकि उनके सामाजिक, शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और वे सामान्य व सहज जीवन व्यतीत कर सकें।