नवजात को एस्फिक्सिया से सुरक्षित बनाने को बरतें खास सावधानी



  • जन्म के तुरंत बाद शिशु का सांस न लेना है  बर्थ एस्फिक्सिया का प्रमुख लक्षण
  • समय से गर्भवती को अस्पताल लायें और संस्थागत प्रसव ही कराएँ

लखनऊ - अवन्तीबाई अस्पताल में गत आठ जनवरी को जन्मे शिशु द्वारा प्रसव के दौरान गन्दा पानी पीने से साँस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके चलते डॉक्टर की सलाह पर तुरंत शिशु को सिक न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। नवजात के पिता रिज़वान बताते हैं कि प्रसव पीड़ा होते ही जब पत्नी को अस्पताल लेकर आये तो बताया गया कि बच्चे ने पेट में मल त्याग दिया है, जिसके चलते तुरंत ऑपरेशन करना होगा। ऑपरेशन से प्रसव के बाद बच्चे का दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था| नवजात पिछले चार दिन से एसएनसीयू में भर्ती है और अभी हालत में सुधार है।

अवंतीबाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान बताते हैं कि बर्थ एस्फिक्सिया या जन्म श्वास रोधक एक ऐसी दशा है, जिसमें नवजात पैदा होने के बाद न तो रोता है और न ही सांस लेता है। बच्चे के मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी के कारण ऐसा होता है। आक्सीजन की कमी होना मुख्यतः बच्चे के मुंह में गंदा पानी चले जाने, कम वजन का पैदा होने, समय से पूर्व पैदा होने या जन्मजात दोष की वजह से हो सकती है। ऐसे में नवजात को तुरंत उचित देखभाल की जरूरत होती है, नहीं तो स्थिति गंभीर बन सकती है।

डॉ. सलमान बताते हैं कि एस्फिक्सिया की वजह से मस्तिष्क को हमेशा के लिए क्षति हो सकती है और इसकी वजह से जीवन पर्यन्त अपंगता भी हो सकती है। उनका कहना है कि अमूमन प्रति 100 प्रसव में 10 बच्चों को बर्थ एस्फिक्सिया की शिकायत होती है।

इसके लिए ज़रूरी है कि गर्भवती को समय से स्वास्थ्य केंद्र लाया जाये और प्रसव स्वास्थ्य केंद्र पर ही हो| इसके साथ ही स्टाफ़ को भी ट्रेंड किया जा रहा है कि ऐसी अवस्था बनती है तो क्या किया जाये| यदि किसी बच्चे के अंदर गंदा पानी चला गया है तो स्टाफ़ को प्रशिक्षित किया गया है कि वह म्यूकस एक्सट्रेक्टर के द्वारा गंदा पानी बाहर निकाल लें, व अम्बु बैग से सांस दिलायें, जिससे नवजात की जान बच सके। परिवार को भी यह समझना है कि वह डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही प्रसव की तैयारी करें।

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार देश में शिशुओं की होने वाली कुल मृत्यु में लगभग 20 प्रतिशत शिशुओं की मौत दम घुटने की वजह से होती है। यह स्थिति ज़्यादातर जन्म के पहले एक घंटे के अंदर होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अधिकतर नवजात मृत्यु (75%) जीवन के पहले सप्ताह के दौरान होती है और पहले 24 घंटों के भीतर लगभग 10 लाख नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाती है| इनकी मृत्यु का प्रमुख कारण समय से पहले जन्म, अंतर्गर्भाशयी संबंधी जटिलताओं (जन्म के समय श्वासनली या जन्म के समय सांस लेने में कमी), संक्रमण और जन्म दोष आदि हैं।