गोरखपुर : टीबी से ग्रसित 15 बच्चों को दी गयी पोषण किट



RAVI PRATAP SINGH -

  • 290 टीबी ग्रसित बच्चों के पोषण की संस्था ने ली जिम्मेदारी
  • 116 बाल टीबी रोगियों को जिले में अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं ने गोद लिया

गोरखपुर- जिले के टीबी से ग्रसित 15 बच्चों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधाकर पांडेय ने सोमवार को पोषण किट प्रदान किया। यह सभी बच्चे 15 वर्ष से कम उम्र के हैं। जिले के 290 ऐसे टीबी रोगियों को अक्षय पात्र संस्था ने गोद लिया है । इसके अलावा 116 बाल टीबी रोगियों को जिले में अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं ने गोद लिया है और उनके पोषण की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि जिले में इस समय कुल 435 बाल टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है । टीबी मरीज को इलाज के साथ-साथ पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है। वैसे तो सरकार की तरफ से इलाज के दौरान प्रत्येक टीबी मरीज के खाते में पोषण के लिए 500 रुपये प्रति माह की दर से भेजे जाते हैं, लेकिन जरूरतमंद परिवारों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। खासतौर से जरूरतमंद परिवार के बच्चों को अगर टीबी हो जाए तो उनकी जिम्मेदारी उठाने से बच्चे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।

डॉ. मिश्र ने बताया कि जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन के निर्देश पर अक्षय पात्र संस्था ने 290 बच्चों को स्वस्थ होने तक प्रति माह पोषक सामग्री देने का निर्णय लिया है । इस कार्यक्रम का शुभारंभ 15 बच्चों को किट बांटने के साथ हुआ है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेने के लिए आगे आएं और उन्हें प्रेरित करें कि न तो बीच में इलाज बंद हो और न ही खानपान पर कोई असर पड़ना चाहिए । जिला क्षय रोग कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एके सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर सिंह, पब्लिक प्राइवेट कोआर्डिनेटर अभय नारायण मिश्र और संस्था के प्रतिनिधि राजीव कुमार प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

पोषण किट में 15 सामग्री : जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि बच्चों को दिये गये पोषण किट में अरहर दाल, मूंगफली, चना, बिस्किट समेत कुल 15 सामग्री शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर टीबी जांच अवश्य कराएं।