लखनऊ। विश्व टीबी दिवस प्रतिवर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूकता फैलाना और इसे समाप्त करने के प्रयास करना है। इस वर्ष की थीम है “हाँ! हम टीबी को ख़त्म कर सकते हैं: प्रतिबद्ध हों, निवेश करें, परिणाम दें।"
इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि मैं आप सभी से तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए सहयोग की अपील करता हूँ। हमारा लक्ष्य "टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश" बनाना है, टीबी एक संक्रामक लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य रोग है। यदि किसी व्यक्ति को टी बी के लक्षण हैं, तो उसे तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करानी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार नि:शुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध करा रही है। टीबी उन्मूलन के प्रयासों में जन-समुदाय का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनता की सतर्कता और भागीदारी से ही ‘टी बी हारेगा देश जीतेगा’ के सपने को पूरा कर सकते हैं जन प्रयास से ही टीबी उन्मूलन में सफलता मिलेगी अतः हम सबको टी बी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में सहयोग करना चाहिए।
टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया द्वारा होने वाली संक्रामक बीमारी है जो कि नियमित इलाज से ठीक हो जाती है। राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर बताते हैं टीबी का बैक्टीरिया जब फेफड़ों को संक्रमित करता है तो पल्मोनरी टीबी होती है जो कि संक्रामक होती है। इसके अलावा अन्य किसी भी अंग में टीबी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहलाती है जो कि गैर संक्रामक होती है। टीबी नाखून और बालों को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है। देश में 80 फीसद टीबी के मामले पल्मोनरी टीबी के और 20 फीसद एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के सामने आते हैं। टीबी के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है जिससे कि समय से जाँच और इलाज हो सके। यह लक्षण हैं –दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान, गर्दन में गांठ/ बांझपन आदि ।सरकार द्वारा टीबी की जाँच और इलाज को लेकर कई योजनायें चलायी जा रही हैं।