गणतंत्र दिवस: 21 तोपों की सलामी भारत की संप्रभुता का विशिष्ट प्रतीक



नई दिल्ली : 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली 21 तोपों की सलामी भारत की संप्रभुता का एक विशिष्ट प्रतीक है। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली यह विशिष्ट सैन्य सलामी राष्ट्रगान के साथ तालमेल बिठाकर भारत के राष्ट्रपति और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करती है। यह सलामी स्वदेशी रूप से विकसित 105 मिमी इंडियन फील्ड गन (आईएफजी) द्वारा दागी जाती है। आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत 2023 में इन्होंने ब्रिटिश काल की पुरानी 25 पाउंडर तोपों की जगह ली। यह समारोह भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट की 1721 फील्ड बैटरी (औपचारिक) द्वारा आयोजित किया जाता है।

21 तोपों की सलामी ठीक 52 सेकंड में दी जाती है, जो राष्ट्रगान की अवधि के बराबर है। प्रत्येक तोप लगभग 2.25 सेकंड के अंतराल पर दागी जाती है। हालाँकि इसे "21 तोपों की सलामी" कहा जाता है, लेकिन आमतौर पर इसे 7 तोपों द्वारा 3-3 तोपों की सलामी से पूरा किया जाता है।