- कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय राजेपुर में 66 छात्राओं ने लिया प्रतियोगिता में भाग
- प्रियंका पहले, सुप्रिया दूसरे व हिमशी तीसरे स्थान पर रहीं, प्रिया व अपूर्वा को सांत्वना पुरस्कार
फर्रुखाबाद । कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय गांधी ब्लॉक राजेपुर में स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत पोस्टर, रोल प्ले और क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में 66 छात्राओं ने भाग लिया, जिसमें कक्षा-सात की प्रियंका पहले, कक्षा-आठ की सुप्रिया दूसरे और कक्षा-आठ की हिमशी तीसरे स्थान पर रहीं। कक्षा-सात की प्रिया व कक्षा-आठ की अपूर्वा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) के सहयोग से किया गया।
प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं को डायरिया रोकथाम और प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया गया। राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की डॉ. प्रतिभा एवं डॉ. क्षमा चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चे को दिन में तीन बार से अधिक पतली दस्त हो, प्यास ज्यादा लगे और आँखें धंस गयी हों तो यह डायरिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को जल्दी से जल्दी ओआरएस का घोल देना शुरू करें और तब तक इस घोल को देते रहें जब तक की दस्त ठीक न हो जाए। ओआरएस और जिंक की गोली स्थानीय एएनएम या आशा कार्यकर्ता के सहयोग से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए टीकाकरण सारणी के अनुसार सारे टीके लगवाएं और रोटावायरस, विटामिन ए को लेना न भूलें। भोजन को ढककर रखें ताकि मक्खियाँ उस पर न बैठें। पीने के पानी को साफ़ रखें और पीने के पानी को निकालने के लिए डंडीदार लोटे का प्रयोग करें। छह माह से छोटे बच्चों को दस्त होने पर भी स्तनपान जारी रखना चाहिए। डायरिया के दौरान ओआरएस से शरीर में पानी की कमी को रोकें। इस मौके पर आरबीएसके की डॉ. प्रतिभा और डॉ. क्षमा ने 66 बालिकाओं के ब्लड प्रेशर, आँखों और हीमोग्लोबिन की जाँच भी की। इसके अलावा जरूरी दवाओं का भी वितरण किया।
ज्ञात हो कि स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम फर्रुखाबाद समेत प्रदेश के 13 जनपदों में चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है। डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए, इसके लिए समुदाय में जागरूकता बहुत जरूरी है। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग से राज आर्यन अग्निहोत्री, श्वेता सागर,अध्यापिका श्वेता मिश्रा, शिवकीर्ति बघेल, देवेश कुमार, अरुणा राठौर व अन्य शिक्षिकाओं के साथ पीएसआई इंडिया से अमरीश कुमार पाण्डेय, अनुपम मिश्रा आदि उपस्थित रहे।