अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान उत्तर प्रदेश की स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजित



लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश की स्थापना दिवस के अवसर पर आज अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा विश्व शांति हेतु संगोष्ठी, धम्म सभा, परित्राण पाठ, पुस्तक विमोचन, निबन्ध, चित्रकला प्रतियोगिता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सदस्य विधान परिषद अवनीश सिंह, विशिष्ट अतिथि जे.पी. सिंह, सलाहकार संस्कृति एवं पर्यटन, उ.प्र., हरगोविंद बौद्ध, का. अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान,  संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध, भिक्षु शील रतन, निदेशक संस्थान डॉ. राकेश सिंह, अरुणेश मिश्र, प्रो. अवधेश कुमार चौबे, डॉ. धीरेंद्र सिंह, अमरेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, विभिन्न विद्यालयों से आये छात्र-छात्राएं, अध्यापक, गणमान्य नागरिक एवं बौद्ध विद्वान तथा पत्रकार बंधु उपस्थित थे। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरगोविंद बौद्ध, का.अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ ने की। कार्यक्रम का आरंभ भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन, बुद्ध वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि सदस्य विधान परिषद अवनीश सिंह ने बताया कि भगवान बुद्ध ने करुणा, शांति और मानवता के उत्थान का संदेश दिया है। भगवान बुद्ध के अहिंसा, मध्यम मार्ग और करुणा के सिद्धांत आज भी समाज को सही दिशा देने में सक्षम हैं। उन्होंने युवाओं से बुद्ध के विचारों को जीवन में अपनाकर समरस, नैतिक और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। 

विशिष्ट अतिथि जे.पी. सिंह, सलाहकार संस्कृति एवं पर्यटन, उ.प्र. ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और बौद्ध संस्कृति भारत की उसी जीवंत परंपरा का अभिन्न अंग है। बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना तथा युवा पीढ़ी को उनसे जोड़ना समय की आवश्यकता है, जिससे एक शांत, नैतिक और सुसंस्कृत समाज का निर्माण हो सके।

संस्थान के सदस्य भिक्षु शील रतन ने बताया अपने संदेश में कहा कि भगवान बुद्ध का धम्म मानव जीवन को अज्ञान से प्रज्ञा की ओर, हिंसा से करुणा की ओर और अशांति से शांति की ओर ले जाने वाला मार्ग है। बुद्ध का संदेश आज भी मानवता के कल्याण का शाश्वत पथ प्रदर्शक है। 

संस्थान के का. अध्यक्ष हरगोविंद बौद्ध ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि भगवान बुद्ध का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान का मार्गदर्शन भी करता है। बुद्ध के करुणा, शील और प्रज्ञा के सिद्धांत आज के समय में वैश्विक शांति, सांस्कृतिक समरसता एवं पर्यटन के माध्यम से भारत की बौद्ध विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और बौद्ध पर्यटन के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे बुद्ध के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जा सके। 

संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार एवं विकास के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहा है। संस्थान ने शैक्षणिक  कार्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, समझौता ज्ञापन, बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव, योग, ध्यान, विपासना शिविर, बौद्ध पर्यटन से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रयास किया है। इसके साथ ही आपने बताया कि बौद्ध धर्म ने अहिंसा, करुणा, समानता और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों द्वारा विश्व शांति की मजबूत नींव रखी है। यह धर्म न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन देता है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी शांति और सद्भाव स्थापित करने का संदेश देता है। वर्तमान समय में जब विश्व हिंसा और तनाव से जूझ रहा है, तब बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं।   

इसी क्रम में शोधार्थी शिखा एवं सुशील की पुस्तक बोधि पाठशाला का लोकार्पण सदस्य विधान परिषद अवनीश सिंह एवं आये हुए गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान ने ‘बुद्ध के विभिन्न स्वरुप’ विषय पर चित्रकला एवं ‘बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका पर्यटन में योगदान’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें लगभग 200 से अधिक बच्चों ने प्रतिभागिता की। 

चित्रकला प्रतियोगिता में साक्षी गुप्ता को प्रथम, अपराजिता सिंह को द्वितीय तथा सौम्या शर्मा को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों हेमा पटेल, संस्कृति, आकृति सिंह, गौरी सिंह, अंशिका सिंह को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी तरह निबंध प्रतियोगिता में काव्या मौर्या को प्रथम, निधि राजभर को द्वितीय, चाँदनी देवी को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों लक्ष्मी, स्तुति राजपूत, शिंजनी मिश्रा, आर्यन चौधरी, अंकिता सिंह को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया। 

संस्थान ने खुशी फॉउण्डेशन के साथ स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य से सम्बंधित परीक्षण जैसे आंख, ह्रदय, ब्लड प्रेशर की जाँच, सीपीआर का प्रशिक्षण आदि निःशुल्क किये गए। उक्त शिविर में मैक्स हॉस्पिटल (लखनऊ), डॉ अग्रवाल्स ऑय हॉस्पिटल एवं डॉक्टर यसनो एलएलपी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। 

अंत में निदेशक संस्थान डॉ. राकेश सिंह ने कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य अतिथियों, बौद्ध भिक्षुओं, वक्ताओं, मीडिया कर्मियों एवं विद्वानों, छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।