देश को टीबी मुक्त बनाने को जनसहभागिता बहुत जरूरी - मुकेश शर्मा



  • विश्व क्षयरोग दिवस (24 मार्च) पर विशेष

देश को क्षय रोग यानि ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) मुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बस, इसके लिए जरूरी है कि टीबी की समय से पहचान के लिए लक्षण दिखने पर शीघ्र जांच कराई जाये, जाँच में पाजिटिव आने पर नियमित रूप से दवा का सेवन किया जाए, साथ में पोषण का पूरा ख्याल रखा जाए और इलाज का कोर्स पूरा होने पर एक बार फिर से जांच करायी जाए ताकि पता चल सके कि अब मरीज पूरी तरह टीबी मुक्त है।

टीबी की शीघ्र जाँच के लिए अत्याधुनिक उपकरण मुहैया कराये गए हैं, जिससे कुछ ही घंटों में रिपोर्ट मिल रही है। शोध को बढ़ावा दिया गया है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध करायी गयी हैं, जिससे लम्बे समय तक चलने वाले इलाज की समयावधि में कमी आई है। मरीजों का समय से इलाज के साथ पोषण का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है, इसके लिए इलाज के दौरान हर माह निर्धारित पोषण राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में दी जा रही है। इसके बाद भी टीबी पर पूरी तरह विराम नहीं लग पाया  है, जिससे निपटने के लिए जनसहभागिता की बड़ी जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि लक्षण वाले व्यक्तियों को शीघ्र जांच और इलाज के लिए प्रेरित किया जा सके। समुदाय को इस बात का भी ख्याल रखना है कि किसी भी टीबी मरीज के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न होने पाए ताकि लोग बिना संकोच के टीबी की जाँच को खुलकर अपने आप सामने आ सकें। टीबी के प्रति जागरूकता लाने और लक्षण दिखने पर समय से जांच और इलाज का कोर्स पूरा करने के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए ही हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इस साल इस खास दिवस की थीम है- “हाँ! हम टीबी को ख़त्म कर सकते हैं, देशों के नेतृत्व में, लोगों की शक्ति से” (यस! वी कैन एंड टीबी, लेड बाय कंट्रीज, पावर्ड बाय प्यूपल) ।

आज की भाग दौड़ भरी जिन्दगी में लोगों के पास खाने-पीने और सोने तक का समय भी मुश्किल से मिल रहा है। शारीरिक श्रम की बात तो बहुत दूर की कौड़ी है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन न ग्रहण करके जंक फ़ूड पर निर्भर रहने वाला वर्ग इम्यूनिटी कमजोर पड़ने के कारण बीमारियों की गिरफ्त में आ रहा है। ज्ञात हो कि टीबी का बैक्टीरिया बहुत से लोगों में निष्क्रिय रूप से शरीर में विद्यमान रहता है लेकिन वह टीबी के रूप में तभी आक्रमण करता है जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म हो जाती है। नाखून और बालों को छोड़कर टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। फेफड़ों की टीबी सबसे आम है, केवल यही टीबी संक्रामक भी है। जागरूकता की कमी के कारण आज भी लोग खांसी और बुखार का इलाज तो महीनों कराते हैं किन्तु टीबी की जांच कराने से कतराते हैं जबकि समय से टीबी का पता चल जाए और पूरा इलाज किया जाए तो टीबी से सुरक्षित बना जा सकता है। एचआईवी, मधुमेह, जटिल श्वास रोग, शराब और तम्बाकू का उपयोग करने वालों में क्षय रोग होने की सम्भावना अधिक होती है, इसी के दृष्टिगत क्षय रोगियों की सह रुग्णता (एचआईवी, मधुमेह आदि) से संबंधित जांच अनिवार्य की गयी है।    

टीबी दो प्रकार की होती है- साधारण टीबी एवं जटिल टीबी। साधारण टीबी जल्दी ठीक हो जाती है, जबकि जटिल टीबी का उपचार लम्बा चलता है। टीबी के इलाज में प्रयोग होने वाली कुछ दवाएं जब किसी मरीज पर बेअसर हो जाती हैं तो उसे एम.डी.आर. टीबी (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) कहते हैं। इससे इतर जिन एम.डी.आर. मरीजों में कुछ अन्य दवाओं के लिए भी प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है उसे प्री.एक्स.डी.आर. टीबी कहते हैं। पिछले कुछ वर्षो में जटिल टीबी (एम.डी.आर. एवं एक्स.डी.आर. टीबी) के उपचार हेतु नई दवाओं के प्रयोग पर पूरी दुनिया में अनुसंधान चल रहे हैं। जाँच और इलाज को लेकर क्रांतिकारी परिवर्तन भी आये हैं ।

टीबी के प्रमुख लक्षण - वजन का एकाएक कम होना, लगातार दो-तीन हफ्ते तक खांसी आना, कफ में कभी-कभी खून आना, बुखार आना और रात में बुखार बढ़ जाना, रात में पसीना आना, लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, सांस लेने में दिक्कत होना या सीने में दर्द होना आदि।  

टीबी से बचाव के प्रमुख उपाय - टीबी के लक्षण नजर आयें तो जल्द से जल्द जांच कराएँ, टीबी से संक्रमित व्यक्ति के निकट सम्पर्क में रहने से बचें, खांसते-छींकते समय रुमाल या टिश्यु पेपर का इस्तेमाल करें ताकि बैक्टीरिया का फैलाव न हो, भीड़भाड़  में मास्क का इस्तेमाल करें, बच्चों को बीसीजी का टीका जरूर लगवाएं, संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन नियमित रूप से करें, शारीरिक श्रम और व्यायाम को दिनचर्या में जरूर शामिल करें, भरपूर नींद लें।

 

 (लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जेक्युटिव डायरेक्टर हैं)