रंगमंच समाज का दर्पण, राष्ट्रभक्ति और संस्कृति से जुड़े नाटकों को बढ़ावा दें: मुख्यमंत्री



लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और यही समाज की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच वह मंच है, जहां भावनाएं शब्द बनती हैं, शब्द अभिनय का रूप लेते हैं और यही अभिनय जनचेतना बनकर समाज को नई दिशा देता है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग और भारतेंदु नाट्य अकादमी से नई और पुरातन पीढ़ी को जोड़कर आगे बढ़ने का आह्वान किया और राष्ट्रभक्ति से जुड़े नाटकों के मंचन पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक आयोजित स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का शुभारंभ कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट और शब्दों के चयन को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने अकादमी के अध्यक्ष द्वारा रखी गई मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन देते हुए अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि छात्रावास निर्माण कर उसे अकादमी को हस्तांतरित किया जाए, जिससे संस्थान को और मजबूती मिल सके। 

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार प्राप्त करने पर डॉ. अनिल रस्तोगी को बधाई भी दी और कहा कि वर्ष 1976 में देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था, तब भी भारतेंदु नाट्य अकादमी ने अपने पाठ्यक्रमों को निरंतर संचालित रखा। मुख्यमंत्री ने ‘आनंदमठ’ उपन्यास पर आधारित नाट्य मंचन की सराहना करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ गीत राष्ट्रभक्ति और स्वराज के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने बंगाल के अकाल और स्पेनिश फ्लू जैसी ऐतिहासिक त्रासदियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी शासन के दौरान जनता की पीड़ा की अनदेखी की गई, जबकि संवेदनशील सरकारें कठिन परिस्थितियों में नागरिकों के हितों की रक्षा करती हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि संवेदनशील शासन व्यवस्था ही समाज को संकटों से उबारने में सक्षम होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय ऐसा भी रहा, जब कुछ संस्थानों में गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया गया और पेशेवर गुंडों व माफियाओं को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि समाज के वास्तविक नायकों की उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज अपने सच्चे नायकों को पहचान दे और उनके जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारतेंदु नाट्य अकादमी से प्रत्येक जनपद में इस पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित करने का आह्वान किया।

उन्होंने भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण और महाभारत भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने महाराज सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह और 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य संग्राम के नायकों पर स्थानीय स्तर पर नाट्य श्रृंखला प्रारंभ करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि संवाद, संगीत और अभिनय की प्रभावशीलता से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है और लोगों को इतिहास के गौरवशाली अध्यायों से जोड़ा जा सकता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज परंपरा, संस्कृति और विरासत को सम्मान देना जानता है। उन्होंने मध्य प्रदेश में तैयार किए गए सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में वीरांगना अवंतीबाई, झलकारी बाई, ऊदा देवी, महाराज बिजली पासी, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायकों पर आधारित लघु नाटक तैयार करने का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का प्रणेता बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं ने समाज में जनचेतना जगाने का कार्य किया। उन्होंने काशी नागरी प्रचारिणी सभा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी भाषा के प्रसार में इस संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने साहित्य और रंगमंच के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कला की सभी विधाओं में अत्यंत समृद्ध रहा है। गायन, वादन, नृत्य और नाट्य के क्षेत्र में प्रदेश के कलाकारों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने गोरखपुर में कलाकारों के लिए बनाए गए प्रेक्षागृह तथा आजमगढ़ के हरिहरपुर गांव में संगीत परंपरा के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया और शोध कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृतियों पर आधारित त्रिदिवसीय कार्यक्रम 24 अप्रैल से लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि साहित्य और रंगमंच के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मॉरीशस यात्रा का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि वहां भी भारतीय मूल के लोग रामचरित मानस को घर-घर में पूजते हैं, जो भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान का प्रमाण है।

कार्यक्रम में भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह सहित अनेक रंगकर्मी, पूर्व छात्र और कला प्रेमी उपस्थित रहे।