- विश्व हाथ स्वच्छता दिवस (05 मई) पर विशेष
- “कार्रवाई से जीवन बचता है” थीम पर इस बार मनाया जाएगा यह खास दिवस
संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे सरल और कारगर तरीका हाथों को साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक सही तरीके से धोना है। स्वास्थ्य सेवाओं को भी संक्रमण से सुरक्षित बनाने के साथ ही मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराने के लिए हाथों को केवल धोना ही नहीं बल्कि सही तरीके से धोना बहुत जरूरी होता है। इसी तरह अपने साथ ही अपनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी हाथों को सही तरीके से धोना आवश्यक है। दिनभर में हम हाथों से कई तरह के जरूरी काम करते हैं और उस दौरान कई लोगों, सतहों और वस्तुओं के सीधे सम्पर्क में आते हैं। इससे गंदगी, रोगाणु, कीटाणु और बैक्टीरिया की गिरफ्त में आने की पूरी सम्भावना होती है। इसलिए साबुन-पानी से हाथों को सही तरीके से धोना बहुत जरूरी होता है।
अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मी मरीजों की देखभाल से पहले और बाद में हाथों को सही तरीके से धोना कभी न भूलें, क्योंकि वह अस्पताल में भर्ती मरीजों के देखभाल के दौरान संक्रमण के जोखिम से घिरे होते हैं। सही तरीके से हाथ धोने से सर्दी, फ्लू, दस्त व अन्य संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित बना जा सकता है। समुदाय के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों को जागरूक बनाने के लिए ही हर साल पांच मई को विश्व हाथ स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इस साल इस खास दिवस की थीम -जीवन बचाएं : अपने हाथ साफ़ करें, “कार्रवाई से जीवन बचता है” (एक्शन सेव्स लाइव्स) तय की गयी है। यह थीम हर किसी को स्वास्थ्य देखभाल में संक्रमण को रोकने, मरीजों को सुरक्षित बनाने और समुदाय के साथ स्वास्थ्य कर्मियों में जागरूकता फैलाने के बारे में प्रेरित करती है।
ज्ञात हो कि विश्व हाथ स्वच्छता दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2009 में “जीवन बचाओ-अपने हाथ साफ़ करो” स्लोगन के साथ किया था, तभी से यह हर साल पांच मई को हाथों की स्वच्छता के प्रति जन-जन में जागरूकता की अलख जगाने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह भी है कि नियमित रूप से सही तरीके से हाथों को धोने से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है। इसके साथ ही घरों, स्कूलों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य सुविधाओं में बीमारियों के फैलने के जोखिम को कम करना होता है।
हाथों की सही तरीके से धोने के लिए SUMAN K (सुमन-के) को अपनाएं - हाथों को धोना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि सही तरीके से हाथों को धोना जरूरी होता है। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर आज S U M A N K (सुमन-के) के बारे में लोगों खासकर बच्चों को सरल तरीके से समझाने की जरूरत है ताकि वह इन छह चरणों को अपनाकर हाथों की सही स्वच्छता के लिए सक्षम बन सकें। यह छह चरण हैं – S (एस) -साबुन-पानी से झाग बनाने के बाद पहले सीधी हथेलियों को बारी-बारी से घिसें, U(यू) - उल्टी तरफ हाथों को बारी-बारी से घिसें, M (एम)- मुट्ठी बंदकर हाथों को अच्छी तरह घिसें, A (ए)- अंगूठों को अच्छी तरह से रगड़ें, N (एन) - नाखूनों को अच्छी तरह से साफ़ करें, K (के)- कलाइयों को भी ठीक से रगड़ें। इस तरह इन छह चरणों को अपनाकर संक्रामक बीमारियों को मात दिया जा सकता है। इसकी आदत बचपन से ही विकसित की जाए तो आगे चलकर भी यह सदा के लिए बनी रहती है।
हाथों को सही तरीके से कब-कब धोना बहुत जरूरी - बच्चों की देखभाल से पहले, मरीजों की सेवा से पहले और बाद में, खाना बनाने या खाने से पहले, शौचालय का उपयोग करने के बाद, खांसने, छींकने या नाक साफ़ करने के बाद, कचरा उठाने या किसी गन्दी सतह को छूने के बाद, जानवरों या पालतू जानवरों को छूने के बाद हाथों को साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक सही तरीके से अवश्य धोएं। ध्यान रहे कि अगर हाथ दूषित हैं तो खाना बनाते समय, खाना खाते समय और चेहरे को छूते वक्त हानिकारक कीटाणु शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और बीमारी को जन्म दे सकते हैं। इन जरूरी कार्यों से पहले साबुन-पानी से हाथों को धोने से कीटाणु का सफाया हो जाता है। गीले हाथों में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, इसलिए हाथों को धोने के बाद साफ़-सुथरी तौलिये या ड्रायर से ही हाथों को सुखाएं।
(लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं)