नई दिल्ली(ऑनलाइन डेस्क) - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के एक मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र में परिवर्तन का प्रमाण बताया है। दक्षिण कोरिया में प्रवासी भारतीयों से बातचीत में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी नो फर्स्ट यूज़ नीति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह किसी भी प्रकार की परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। श्री सिंह ने रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात अगले एक से दो वर्ष में 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने के लिए तैयार है, जबकि रक्षा उत्पादन अगले कुछ महीनों में पौने दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारत अब एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है जो दुनिया को समाधान प्रदान करता है।
रक्षा मंत्री ने सियोल में भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। अपने संबोधन में श्री सिंह ने कहा कि वाणिज्यिक क्षेत्र में भारत-कोरिया औद्योगिक सहयोग की सफलता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक भरोसेमंद साझेदारी की अपार संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस सफल मॉडल को रक्षा क्षेत्र में भी विस्तारित किया जाए, जहां प्रौद्योगिकी, नवाचार, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक विश्वास तेजी से परस्पर जुड़ते जा रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि दोनों देश भविष्य के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और रक्षा प्रणालियों का संयुक्त रूप से विकास और उत्पादन कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत-कोरिया रक्षा नवाचार और प्रौद्योगिकी साझेदारी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देते हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने और प्रौद्योगिकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।