राज्यस्तरीय कार्यशाला में प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने पर मंथन



  • विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने रखे अपने विचार

लखनऊ  । उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने पर गंभीरता से विचार के लिए यहाँ एक होटल में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में कई ऐसे बिंदुओं पर सहमति बनी जिस पर सभी संस्थाओं ने आगे बढ़ने का संकल्प लिया। ज्वाइनिंग फ़ोर्स इंडिया (जेऍफ़आई), कैम्पेन अंगेस्ट चाइल्ड लेबर, पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति, गोरखपुर और पार्टिसिपेटरी एक्शन फॉर कम्युनिटी एम्पावरमेंट (पेस) के तत्वावधान में चाइल्ड फण्ड इंडिया व बीएमजेड के सहयोग से यह कार्यशाला आयोजित की गयी।

कार्यशाला में पेस संस्था की सचिव राजविंदर कौर ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा करना, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बनाना और वर्ष 2026-27 के लिए प्रभावी कार्ययोजना को तैयार करना है। पेस संस्था के निदेशक टी. थॉमसन ने विशेष प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर परियोजना के माध्यम से किये जा रहे प्रयासों को साझा किया। इसके साथ ही देश में बाल श्रम उन्मूलन की राष्ट्रीय नीतियों, कानूनी प्रावधानों और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य नोडल अधिकारी (बाल श्रम मुक्त) सैयद रिजवान अली ने वर्ष 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की राज्य सरकार की रणनीतियों, लक्ष्यों और जिला स्तर की जिम्मेदारियों के बारे में बताया। इसके अलावा विभिन्न जनपदों के प्रतिनिधियों ने जिला स्तरीय योजनाओं, चुनौतियों एवं नवाचारों को प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के दौरान पेस संस्था, विज्ञान फाउंडेशन-लखनऊ, चाइल्ड फण्ड इंडिया, पीजीएसएस गोरखपुर, सेफ सोसाइटी के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन के क्षेत्र में किये गए सफल हस्तक्षेपों और सर्वोत्तम प्रयासों को केस स्टडी के माध्यम से साझा किया गया। विशेषज्ञों ने बाल मित्र ग्राम पंचायतों, बाल संरक्षण समितियों और सामुदायिक निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्रावस्ती से आये बाल प्रतिनिधि ने अपने अनुभव साझा किये। प्रतिभागियों ने बच्चों की आवाज को नीति निर्माण और स्थानीय कार्ययोजनाओं में शामिल करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। पैनल समूह चर्चा के माध्यम से राज्य एवं जनपदों में बाल मजदूरी के वर्तमान आंकड़ों, सरकारी दृष्टिकोण और आगामी सामूहिक रणनीति पर भी गहन चर्चा के साथ भविष्य की योजना भी बनायी गयी। प्रतिभागियों ने बाल श्रम रोकथाम, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुँच बढाने और सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। कार्यशाला के अंत में पेस संस्था के निदेशक टी. थॉमसन ने कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्षों, आगामी कार्य योजनाओं को साझा करते हुए सभी का आभार जताया।

कार्यशाला में कैरिटास की टीम लीडर व बाल अधिकार विशेषज्ञ आशा एक्का, कैम्पेन अंगेस्ट चाइल्ड लेबर के प्रदेश संयोजक प्रतिनिधि राज कुमार, बाल रक्षा भारत से डॉ. संतोष कुमार कौशल, यूनिसेफ से रिजवाना, फिरोजाबाद की बाल संरक्षण अधिकारी अपर्णा कुलश्रेष्ठ, बाल कल्याण समिति श्रावस्ती के अध्यक्ष विश्राम, हरदोई से संतोष सिंह, राजेन्द्र यादव-सीतापुर, शेखर मालाकर स्टेट हेड एसओएस, लीलाधर-श्रम अधिकारी सीतापुर, बाल संरक्षण विशेषज्ञ जे.पी. शर्मा, अभिषेक पाठक-डॉ. शम्भूनाथ रिसर्च संस्था बाराबंकी, बाल श्रम उन्मूलन पर प्रयासरत सामाजिक संगठनों के प्रमुख व प्रतिनिधियों बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और बाल प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और अपने विचार साझा किये।