सेवा प्रदाताओं का डायरिया रोकथाम पर अभिमुखीकरण



  • ’डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत कार्यशाला आयोजित  

दरभंगा । स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से जिले में चल रहे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को सेवा प्रदाताओं की अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के शिशु रोग विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित इस कार्यशाला में छह चिकित्सा पदाधिकारी एवं 30 स्टाफ नर्सेज ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सेवा प्रदाताओं के माध्यम से डायरिया के बारे में समुदाय को विस्तार से जानकारी देना, ओआरएस और जिंक से डायरिया रोकथाम के उपायों के बारे में बताना था।

कार्यशाला में पीएसआई इंडिया के संजय तरुण ने ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के 13 और बिहार के तीन जिलों  में चलाया जा रहा है, जिसमें शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए, इसमें सेवा प्रदाता बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 

इस मौके पर शिशु रोग विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि समुदाय स्तर पर यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि टीकाकरण सारणी के अनुसार बच्चे को सारे टीके लगवाएं और रोटावायरस, विटामिन ए को लेना न भूलें। भोजन को ढककर रखें ताकि मक्खियाँ उस पर न बैठें। जिंक की खुराक को दस्त ठीक होने के बाद भी 14 दिनों तक जारी रखें। पीने के पानी को साफ़ रखें और पीने के पानी को निकालने के लिए डंडीदार लोटे का प्रयोग करें । छह माह से छोटे बच्चों को दस्त होने पर भी स्तनपान जारी रखें। डायरिया के दौरान ओआरएस से शरीर में पानी की कमी को रोकें। इन संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में सेवा प्रदाता अहम भूमिका निभा सकते हैं।

डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि समुदाय में डायरिया को लेकर आज भी कई तरह की भ्रांतियां व्याप्त हैं, जिनको दूर करना भी बहुत जरूरी है। लोगों में भ्रांति है कि सर्दियों में बच्चे को दस्त होने पर ओआरएस नहीं देना चाहिए, इससे बच्चे को ठंड लग सकती है जबकि ऐसा कदापि नहीं है ओआरएस दस्त से बच्चे के शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और जान बचाता है। स्टाफ नर्स नूतन कुमारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों में यह भी भ्रम है कि दस्त होने पर बच्चे को ठोस आहार नहीं देना चाहिए, ऐसा कतई नहीं है ,छह महीने से बड़े बच्चों को हल्का और पचने वाला आहार देना जारी रखें। दस्त का सही समय पर उपचार बेहद जरूरी है क्योंकि उपचार न मिलना बच्चे के जीवन को संकट में डाल सकता है।