नई दिल्ली - कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब भारत के विकास पथ का केंद्रीय स्तंभ बन चुकी है। यह न केवल शासन को मजबूत कर रही है बल्कि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को भी बढ़ा रही है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में AI नागरिकों तक सकारात्मक बदलाव पहुँचाने में मदद कर रही है।
मानव प्रगति हमेशा प्रौद्योगिकी से प्रभावित रही है। बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने जीवन और कार्य के स्वरूप को बदल दिया। अब AI इसी क्रम को आगे बढ़ा रही है, जिससे भारत में नवाचार, समावेशी विकास और बेहतर शासन के अवसर बन रहे हैं।
इसी दृष्टिकोण को सशक्त बनाने के लिए इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है, जिसमें वैश्विक नेता, नीति निर्माता, टेक्नोलॉजी कंपनियां, नवप्रवर्तक और विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन में समावेशी विकास और सतत शासन के लिए AI की क्षमता पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का लोकतंत्रीकरण क्या है?
AI का लोकतंत्रीकरण का अर्थ है इसे सभी के लिए सुलभ, किफायती और उपयोग योग्य बनाना। इसमें केवल अनुप्रयोगों तक पहुंच नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग शक्ति, डेटासेट और मॉडल पारिस्थितिकी तक समान पहुंच शामिल है। इससे भारत के कार्यबल में 60 लाख से अधिक लोग एआई और टेक्नोलॉजी पारिस्थितिकी में योगदान दे रहे हैं। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, AI के माध्यम से देश के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को सेवाओं और वित्तीय प्रणालियों तक व्यापक पहुंच प्रदान की जा सकती है।
सार्वजनिक प्रभाव और व्यावहारिक अनुप्रयोग : भारत का दृष्टिकोण एआई के व्यावहारिक और समावेशी उपयोग पर केंद्रित है। कृषि में, AI मौसम का पूर्वानुमान, कीटों का खतरा और सिंचाई निर्णयों में किसानों की मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सेवा में, AI रोग पहचान, चिकित्सा छवियों के विश्लेषण और टेलीमेडिसिन में सहायता कर रहा है।
आपदा प्रबंधन में भी AI अहम भूमिका निभा रहा है। भारतीय मौसम विभाग वर्षा और चरम मौसम की भविष्यवाणी के लिए एआई का उपयोग कर रहा है, जबकि MausamGPT जैसी तकनीकें वास्तविक समय में सलाह प्रदान कर रही हैं।
अवसंरचना तक पहुंच : AI के लोकतंत्रीकरण के लिए मूलभूत अवसंरचना का खुला, किफायती और व्यापक रूप से सुलभ होना आवश्यक है। भारत का इंडिया AI मिशन मार्च 2024 में ₹10,371.92 करोड़ की वित्तीय मंजूरी के साथ पांच साल की अवधि में एआई तक पहुंच, डेटा उपलब्धता और जिम्मेदार उपयोग को सुदृढ़ कर रहा है।
AI के लोकतंत्रीकरण से न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के लिए समग्र विकास और अवसरों को भी सुनिश्चित करेगा।