7 साल पहले शुरू हुई थी वंदे भारत ट्रेन, अब तक 164 ट्रेनें हुई शुरू



नई दिल्ली : भारत के रेलवे इतिहास में रफ़्तार, आराम और तकनीक—इन तीनों का नया नाम वंदे भारत ट्रेन बन चुका है। नई दिल्ली–वाराणसी से शुरू हुई ये यात्रा आज देश के कोने-कोने तक फैल चुकी है और अब चेयर-कार से स्लीपर वेरिएंट तक का सफर, भारतीय रेलवे को एक नई दिशा दे रहा है। देखिए, वंदे भारत की इसी हाई-टेक यात्रा की हमारी ये खास रिपोर्ट…

भारतीय रेलवे की रफ़्तार बदलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ने 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली से वाराणसी रूट से अपनी यात्रा शुरू की थी। छह साल में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। देश में अबतक 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएँ शुरू हो चुकी हैं। एयरक्राफ्ट-स्टाइल कम्फ़र्ट, आधुनिक डिजाइन और कम यात्रा समय ने इसे यात्रियों की पहली पसंद बना दिया है।

इसी आधुनिकीकरण का अगला बड़ा कदम है, वंदे भारत स्लीपर जो कि भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन हैं। 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन स्टेशन से देश की पहली वंदे भारत स्लीपर को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन हावड़ा से मालदा से कामाख्या रूट पर चलाई गई, जिससे बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के बीच लंबी दूरी की यात्रा तेज़, सुरक्षित और ज्यादा आरामदायक हो गई है। लंबी दूरी के सफर के लिए तैयार इस स्लीपर वेरिएंट में नॉइज़-फ्री एल्युमिनियम कोच, हाई-कम्फ़र्ट बर्थ, स्मार्ट LED लाइटिंग, सेंसराइज्ड डोर, और भारतीय रेलवे की कवच सुरक्षा प्रणाली शामिल है। आधुनिक सुविधाओं के साथ ये स्लीपर मॉडल भविष्य में कई प्रीमियम रूटों पर राजधानी जैसी सेवाओं का मजबूत विकल्प बन सकता है।

चेयर-कार मॉडल से लेकर अब स्लीपर वेरिएंट तक वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे के हाई-टेक बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बन गई है। 2019 की पहली ट्रेन से शुरू हुई ये यात्रा अब देशभर में तेज़ी, सुरक्षा और आधुनिकता का नया अध्याय लिख रही है। आने वाले महीनों में वंदे भारत स्लीपर के कई नए रूट शुरू होंगे। इन ट्रेनों से भारत की पटरियाँ पहले से ज्यादा स्मार्ट और तेज दिखेंगी।