लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि देशी गाय का दूध अमृत के समान है और गौपालक तथा किसान दूध देना बंद करने पर गायों को इधर-उधर न छोड़ें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। संक्रामक रोगों पर नियंत्रण के लिए वैक्सीन और औषधियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी ब्लॉकों में पशुधन औषधि केंद्र खोले जाएंगे, जहां एथनोमेडिसिन की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जाएगी।विधान भवन स्थित तिलक हाल में प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि गोवंश एवं अन्य पशुओं के उपचार के लिए पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं शुरू की जाएंगी। पशुओं की जांच के लिए पैथालॉजी केंद्र खोले जाएंगे। किसानों की सुविधा के लिए नई चारा नीति लागू की गई है, जिसके तहत चारे का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और पशुपालन पर आधारित है तथा प्रदेश की लगभग 68 प्रतिशत आबादी अपनी जीविका के लिए इन्हीं पर निर्भर है। पशुपालन विभाग पारंपरिक विकास के साथ ‘विकसित उत्तर प्रदेश–समर्थ उत्तर प्रदेश 2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पशुजन्य उत्पादों का सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.99 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि में पशुपालन क्षेत्र में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है।उन्होंने बताया कि 20वीं पशुगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का विशाल पशुधन संपदा वाला राज्य है। पशुपालकों के आर्थिक उत्थान के लिए बजट में वर्ष 2017-18 के सापेक्ष वर्ष 2024-25 में लगभग तीन गुना वृद्धि की गई है। प्रदेश देश के दुग्ध उत्पादन में 15.66 प्रतिशत योगदान के साथ प्रथम स्थान पर है। दुग्ध उत्पादन 2017-18 के 290.52 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 388.15 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वहीं अंडा उत्पादन भी इसी अवधि में लगभग 2.5 गुना बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि नस्ल सुधार कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप गायों और भैंसों की दुग्ध उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से अधिक हो चुकी है। ऊन उत्पादन बढ़ाने के लिए भेड़ बाहुल्य 37 जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया गया है। पशुधन की मृत्यु दर कम करने और सेवाओं को मजबूत करने के लिए 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से पशुपालकों के द्वार तक सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति के तहत गो-आश्रय स्थलों का विस्तार किया गया है और संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण हेतु प्रतिपशु प्रतिदिन सहायता राशि 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई है। अनुदानित योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे उनकी आय और पोषण स्तर में वृद्धि होगी। पशुपालन विभाग पशु स्वास्थ्य, सुरक्षा और उत्पादकता बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी में योगदान देने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।