नहीं बढ़ेंगी ब्याज दरें, जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान



नई दिल्ली/मुंबई - भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे चार फीसदी पर बरकरार रखा गया है। आरबीआई(RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह लगातार 10वां मौका है जब रेपो दर में बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले 22 मई 2020 को रेपो दर में बदलाव कर इसे रिकार्ड निचले स्तर पर लाया गया था।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में बताया कि रेपो रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4 फीसदी पर बरकरार रहेगा। एमएसएफ रेट और बैंक रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4.25 फीसदी रहेगा जबकि रिवर्स रेपो रेट भी बिना किसी बदलाव के साथ 3.35 फीसदी रहेगा। वित्त वर्ष 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.2 फीसदी पर और महंगाई दर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

शक्तिकांत दास ने आर्थिक वृद्धि परिदृश्य के बारे में कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर के बारे में बताते हुए दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में 4.9 फीसदी, दूसरी तिमाही में 5 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि एमपीसी के 6 में से 5 सदस्य पॉलिसी रुख ‘अकोमोडेटिव’ रखने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि सीपीआई उम्मीदों के अनुरूप है और खाद्य कीमतों में आशावाद को जोड़ने के लिए आसान है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना एक बड़ा जोखिम है। दास ने कहा कि दिसंबर में महंगाई दर में बढ़ोतरी कोरोना के ओमिक्रोन वेरिएंट के बढ़ने से हुई है  हालांकि, उन्होंने कहा कि अनाज का बफर स्टॉक खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए शुभ संकेत है।