- केजीएमयू के समस्त चिकित्सकों से टीबी से होने वाली मृत्यु की दर को कम करने के लिए डा. सूर्यकान्त ने किया आह्वान
लखनऊ। प्रधानमंत्री ने साल 2025 के अंत तक भारत में टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में सात दिसम्बर 2024 से उत्तर प्रदेश के 15 उच्च प्राथमिकता वाले जनपदों में 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान शुरू किया गया था। मुख्यमंत्री द्वारा इस अभियान की समीक्षा के बाद यह अभियान सभी 75 जनपदों में शुरू कर दिया गया।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष और नार्थ जोन टीबी टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि मेडिकल कॉलेज इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वह उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाले लोगों की जाँच कर रहे हैं और टीबी की पुष्टि होने पर तुरंत इलाज शुरू किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाले समूहों में टीबी होने की संभावना स्वस्थ व्यक्तियों की अपेक्षा ज्यादा होती है। उच्च जोखिम वाले समूह हैं - 60 साल से अधिक उम्र के लोग, डायबिटीज एवं एचआईवी के रोगी, तीन साल के भीतर टीबी मरीज़ जिनका उपचार पूरा हुआ, टीबी रोगी के संपर्क मे रहने वाले लोग, 18.5 किग्रा/मी2 से कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की कुपोषित जनसँख्या, धूम्रपान एवं नशा करने वाले रोगी तथा झुग्गी-झोपड़ियों, मलिन बस्तियों, जेलों, वृद्धाश्रमों आदि में रहने वाले लोग आते हैं।
मेडिकल कॉलेज दो लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं साल 2015 के आंकड़ों के अनुसार प्रति एक लाख की जनसँख्या पर टीबी के नए मरीजों की संख्या में 80 फीसद की कमी करनी है और टीबी से होने वाली मौत की दर 90 फीसद घटाना है व टीबी से होने वाली आर्थिक हानि का प्रतिशन शून्य करना है। इसके साथ ही टीबी की अधिसूचना व अनुपालन को बढ़ाना है, प्रभावी उपचार प्रदान करना तथा सहवर्ती बीमारियों का समुचित उपचार करना।
डा. सूर्यकान्त ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त लोगों को टीबी उन्मूलन में सक्रियता से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया और सभी को शपथ भी दिलाई और बताया कि एक मार्च को आगरा में अभियान की समीक्षा बैठक का आयोजन भी होगा। इस कार्यक्रम में केजीएमयू के बाल विभाग से डा. सारिका, चर्म रोग विभाग से डा. परूल, माइक्रोबायोलाजी से डा. उम्रिला, ईएनटी विभाग से डा. वीरेन्द्र, डा. हरीश न्यूरोलॉजी, डा. अभिलाष मानसिक रोग विभाग, डा. एस के सिंह एवं डा. प्रशान्त पीएसएम विभाग एवं सीनियर चेस्ट फिजीशियन डा. मुजम्मिल अहमद खान तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग से डा. अजय कुमार वर्मा, डा. दर्शन बजाज, डा. अंकित कुमार व सभी जूनियर डाक्टर्स एवं हेल्थ वर्कर उपस्थित रहे।