देश में तम्बाकू सेवन से हर साल 13.5 लाख मौत : डॉ. सूर्यकान्त



  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) पर विशेष
  • तम्बाकू की लत से मुक्ति का आज सभी लें प्रण  
  • इस साल दिवस की थीम है- "बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना"

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि देश का करीब हर पांचवां व्यक्ति आज किसी न किसी तरह के तम्बाकू उत्पादों के व्यसन से ग्रसित है। इनमें किशोर-किशोरियों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। तम्बाकू उत्पादों के सेवन से विश्व में हर साल जहाँ 80 लाख लोग दम तोड़ देते हैं वहीँ भारत में इससे हर साल 13.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। लोगों को तम्बाकू की लत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से ही हर साल 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। आज इस दिवस पर हर किसी को प्रण लेने की जरूरत है कि न तो वह खुद व्यसन करेंगे और न ही दूसरों को करने देंगे। इस साल दिवस की थीम है – “ बच्चों को तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना।“ इसका मूल मकसद बच्चों को तम्बाकू उत्पादों की फैक्ट्रियों में काम करने से बचाना है।

डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि आंकड़ों के मुताबिक़ देश में करीब 27 करोड़ लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। इनमें से 2.2 करोड़ 13 से 15 वर्ष के बीच के किशोर-किशोरियां हैं। इनमें 7.7 करोड़ युवा बंद सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान के संपर्क में आते हैं, जिनमें से लगभग एक करोड़ घर पर धूम्रपान के संपर्क में आते हैं। केवल धुआं रहित तंबाकू के सेवन से हर साल करीब दो लाख से ज्यादा भारतीयों की मौत हो जाती है। डॉ. सूर्यकान्त के मुताबिक़ तम्बाकू के कारण 25 तरह की बीमारियां व 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं- मुँह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफडे का कैंसर, प्रोस्टेट का कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेन ट्यूमर आदि। तम्बाकू सेवन के दुष्प्रभावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने व्यापक कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में (सिगरेटस एण्ड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट) कोटपा-2003 के अंतर्गत तम्बाकू या उससे बने पदार्थो का प्रचार-प्रसार, खरीद-फरोख्त (बिक्री) एवं वितरण पर सख्ती से रोक लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही विश्व तम्बाकू निषेध दिवस लोगों को तम्बाकू के उपयोग के जोखिम, तम्बाकू कंपनियों की व्यावसायिक प्रथाओं के बारे में सूचित करता है और तम्बाकू के खतरों से लड़ने के लिए एकजुट होने के लिए प्रेरित करता है। यह दिवस तंबाकू के जोखिम पर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित करने के लिए सदस्य देशों द्वारा 1987 से मनाया जा रहा है।

डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि विश्वभर में तम्बाकू उत्पाद एवं उपयोग के संबंध में भारत दूसरे स्थान पर है। तम्बाकू के दूष्प्रभावों को देखते हुए डा. सूर्यकान्त पिछले पांच वर्षो  (सन 2018) से भारत के प्रधानमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर तम्बाकू के उत्पादन, भण्डारण तथा ब्रिकी पर रोक लगाने की मुहिम चला रहे हैं। दूसरी ओर इसके लिए दो कुतर्क दिये जाते हैं कि तम्बाकू उत्पाद से करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है तथा इससे काफी राजस्व की प्राप्ति होती है। राजस्व की प्राप्ति एक मिथक ही है क्योंकि भारतीय वित्त मंत्रालय भारत सरकार 2015-2016 के आंकड़ों के अनुसार तम्बाकू के उत्पादों से प्रतिवर्ष 31,000 करोड़ रूपये अर्जित होते हैं जबकि हम 10,4500 करोड़ रूपये तम्बाकू के दुष्प्रभावों से हो रही प्रमुख बीमारियों पर खर्च कर देते हैं जैसे- फेफड़े का कैंसर, मुहँ का कैंसर आदि।