- “हमारा संकल्प – फाइलेरिया से मुक्ति”, भ्रांतियाँ दूर कर एमडीए अभियान में 90% दवा सेवन लक्ष्य पर जोर
बाराबंकी। जनपद में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फरवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) से पूर्व गुरुवार को एक स्थानीय होटल में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य मीडिया को अभियान की रणनीति, तैयारियों और प्रमुख संदेशों से अवगत कराते हुए जनसमुदाय में सही जानकारी का प्रसार करना था, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रहे।
कार्यशाला के शुभारम्भ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके श्रीवास्ताव ने किया। WHO के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. नित्यानंद ने बताया कि प्रदेश के 21 जनपदों सहित बाराबंकी में यह अभियान 10 से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। बाराबंकी के सात ब्लॉक में अभियान चलाया जाएगा जिसमें कुल 1695911 जनसँख्या को कवर किया जाना है । इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की 1357 टीमें घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने फ़ाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएँगी। साथ ही 226 सुपरवाइज़र भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर एवं विकलांगता उत्पन्न करने वाला मच्छर-जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षण कई बार संक्रमण के 10–15 वर्षों बाद प्रकट होते हैं, इसलिए लोग अनजाने में इसके वाहक बने रहते हैं और संक्रमण फैलाते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके श्रीवास्ताव ने जोर देते हुए कहा, “फाइलेरिया उन्मूलन के लिए यह आवश्यक है कि कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी दवा का सेवन करे। इसलिए यह अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जन-आंदोलन है।” सीएमओ ने कहा – “उत्तर प्रदेश सरकार फाइलेरिया उन्मूलन को गति देने के लिए पाँच-स्तम्भीय रणनीति (Five-Pillar Strategy) पर कार्य कर रही है। इसमें पहला स्तम्भ सर्वजन दवा सेवन अभियान है, जिसके माध्यम से 90% से अधिक कवरेज सुनिश्चित किया जा रहा है। दूसरा स्तम्भ रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम (MMDP) है, जिसमें हाइड्रोसील सर्जरी, हाथीपांव मरीजों को किट वितरण तथा मामलों की IHIP पर सूचीबद्धता शामिल है। तीसरा स्तम्भ वाहक नियंत्रण है, जिसके अंतर्गत मच्छरों की रोकथाम, स्वच्छता एवं जल प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। चौथा स्तम्भ उच्च-स्तरीय एडवोकेसी एवं अंतर-विभागीय समन्वय है, जिसमें पंचायती राज, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों की भागीदारी से अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। पाँचवाँ स्तम्भ नवाचारी दृष्टिकोण है, जिसमें डिजिटल टूल्स के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग और नए जांच उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। “ हमारा संकल्प – फाइलेरिया से मुक्ति” के तहत अब हमें अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करनी है।“
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि पेरीअर्बन एरिया में माइग्रेशन जैसी चुनौतियाँ अधिक हैं जिनकी वजह से इन सात ब्लॉकों में ख़ास तौर पर उन्मूलन गतिविधियों को तेज़ किया गया है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे यह संदेश जन-जन तक पहुँचाएँ कि दवा खाली पेट न लें, स्वास्थ्यकर्मी के सामने दवा अवश्य खाएँ, हल्के लक्षण शुभ संकेत हैं और आज दवा खाने से आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित होंगी।
फाइलेरिया गंभीर रोग, लेकिन इसपर पूरी तरह रोक संभव : जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुजाता ने कहा कि अभियान की सबसे बड़ी चुनौती लोगों की झिझक, भ्रांतियाँ और दवा के बाद होने वाली हल्की प्रतिक्रियाओं (ADR) को लेकर डर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाएँ WHO प्रमाणित और पूरी तरह से सुरक्षित हैं और कभी-कभी मतली, थकान जैसे हल्के लक्षण कुछ घंटों में स्वतः ठीक हो जाते हैं। गंभीर स्थिति के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम उपलब्ध रहेगी। सबके निरंतर प्रयास से 16 में से 9 ब्लॉक में हमने फ़ाइलेरिया पर काबू पा लिया है । इस बार हमें जागरूकता का स्तर इतना बढ़ाना होगा कि लोग खुद फाइलेरिया की जांच और उससे बचाव की दवा लेने स्वास्थ्य केंद्र तक आएं।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, सहयोगी संस्था पाथ, पीसीआई एवं सें सीफार के प्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पीएसपी सदस्यों ने साझा किये अनुभव: आयुष्मान आरोग्य मंदिर टीपहार के अंतर्गत सामुदायिक स्वस्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में बने रोगी हितधारक मंच (PSP) के सदस्य 28 वर्षीय फाइलेरिया रोगी कारण ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा - मैं पिछले पांच वर्षों से फाइलेरिया से पीड़ित हूँ। फाइलेरिया सिर्फ बीमारी नहीं, जिंदगी भर की परेशानी बन जाती है। मैं नही चाहता कि मेरी जैसी हालत किसी और की हो। इसलिए आप सभी से अपील है कि स्वास्थ्यकर्मी के सामने दवा ज़रूर खाएं। टीपहार के ग्राम प्रधान विजय कुमार ने बताया कि वे भी अब पीएसपी के साथ जुड़कर फ़ाइलेरिया मुक्त अभियान की अगुआई कर रहे हैं। पिछले एमडीए अभियन में उन्होंने स्वयं अपने घर से सामूहिक दवा खाकर अभियान का शुभारम्भ किया जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ गये।
केंद्र व राज्य स्तर के अधिकारियों ने भी लिया तैयारियों का जायज़ा : वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को देखते हुए एमडीए अभियान सरकार की प्राथमिकता पर है । इसी को लेकर बुधवार को केंद्र की दो सदस्यी टीम ने बाराबंकी पहुंचकर अभियान की तैयारियों का जायजा लिया।
इन सात ब्लॉकों में चलेगा अभियान : डीएमओ ने बताया – देवा, दरियाबाद, रामनगर, हरख, सिद्धौर, जटाबरौली व बाराबंकी अर्बन में फ़ाइलेरिया की दर एक प्रतिशत से अधिक है जिस कारण यहाँ एमडीए अभियान चलाया जाएगा ।
जिले में फाइलेरिया की स्थिति: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में बाराबंकी जिले के 7 ब्लॉक फाइलेरिया की चपेट में हैं। जिले में फाइलेरिया के कुल 3617 मरीज़ हैं, जिनमें हाथीपाँव के 3188 और हाइड्रोसील के 429 मरीज़ शामिल हैं। सीएमओ ऑफिस स्थित फाइलेरिया क्लीनिक पर हर बुधवार को रात आठ बजे से फाइलेरिया की जांच की जाती है ।