शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास पर्यावरण शिक्षा, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की आभासी बैठक संपन्न



लखनऊ - शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के पर्यावरण शिक्षा, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बैठक आभासी माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का उद्देश्य पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की समीक्षा करना, आगामी कार्ययोजनाओं पर चर्चा करना तथा कार्यकर्ताओं को पर्यावरण संरक्षण हेतु संगठित और प्रेरित करना रहा।

बैठक की अध्यक्षता संजय स्वामी, राष्ट्रीय संयोजक(पर्यावरण शिक्षा) द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना अनिवार्य है।

बैठक में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. चंद्रप्रकाश, राष्ट्रीय सहसंयोजक(पर्यावरण शिक्षा) ने सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों, जल–जंगल–जमीन के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ताओं को निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया। क्षेत्रीय स्तर पर बैठक के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह, क्षेत्रीय संयोजक, पर्यावरण शिक्षा (पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने बताया कि न्यास का लक्ष्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आचरण को व्यक्तिगत जीवन में अपनाकर उसे परिवार, कार्यक्षेत्र और समाज तक पहुंचाना है।

बैठक का सफल संचालन रामबाबू, सह संयोजक, पर्यावरण शिक्षा (पूर्वी उत्तर प्रदेश) द्वारा किया गया। बैठक में  उपस्थित के. बी. पंत, सहसंयोजक (पर्यावरण शिक्षा - अवध प्रांत) ने पर्यावरणीय गतिविधियों के समन्वय और विस्तार पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इस बैठक की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इं. मून बहादुर ने नेपाल से आभासी रूप से जुड़कर अपने विचार साझा किए।

इसके अतिरिक्त काशी प्रांत के संयोजक प्रमोद द्विवेदी , शोध आयाम अवध प्रांत के संयोजक डॉ. अमरपाल, महानगर संयोजक नंदकिशोर शर्मा, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, वाराणसी के निदेशक कृष्णा कृष्णकांत वाजपेई, वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सिंह, जिला सहसंयोजक लखनऊ अंकुर अग्रवाल  एवं  मुकेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

बैठक में कुल 45 कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की और सभी ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संकल्प लिए। बैठक में प्रत्येक प्रांत में पर्यावरणीय गतिविधियों के प्रचार-प्रसार हेतु प्रतिमान केंद्र खोलने पर विस्तार से चर्चा हुई। 

बैठक में लूनी नदी के संरक्षण हेतु मार्च माह में एक यात्रा निकालने पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही यह भी तय किया गया कि सभी कार्यकर्ता न्यास के पर्यावरण पत्रक प्राप्त करेंगे और उसे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में वितरित करेंगे। अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने यह संकल्प लिया कि वे पहले पर्यावरण संरक्षण से संबंधित आचरण को स्वयं अपनाएंगे, फिर अपने परिवार को प्रेरित करेंगे और उसके पश्चात अपने कार्यक्षेत्र व समाज में इन मूल्यों का व्यापक प्रसार करेंगे। बैठक सकारात्मक ऊर्जा और स्पष्ट कार्यदिशा के साथ संपन्न हुई।