क्षयरोगियों के पोषण में सहभागी बना रामा मेडिकल कॉलेज



  • कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने 11 क्षयरोगियों को लिया गोद
  • जिला क्षयरोग अधिकारी की अध्यक्षता में बाँटी गयीं पोषण पोटली  
  • सभी क्षय रोगी अपने परिजनों की टीबी जांच अवश्य कराएं : डीटीओ

कानपुर नगर - नियमित दवा के सेवन साथ ही प्रोटीन व विटामिन युक्त आहार क्षय रोगियों के लिए बेहद आवश्यक है। इसलिए सभी क्षय रोगी नियमित दवा सेवन के साथ-साथ पोषक आहार पर भी अवश्य ध्यान दें। यह कहना है जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ आरपी मिश्रा का। डॉ मिश्रा गुरुवार को रामा मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने कुल 11 क्षयरोगियों को गोद लेने के साथ ही उन्हें पोषण पोटली भी प्रदान की।

इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ आरपी मिश्रा ने उपस्थित टीबी रोगियों से कहा कि यह  जो पोषण  पोटली दी गई है उसका सेवन जरूर करें क्योंकि टीबी की जो दवाएं दी जाती हैं उनकी तासीर बहुत गर्म होती है । इसलिए इन दवाओं के साथ प्रोटीनयुक्त भोजन का सेवन बहुत जरूरी होता है । यह पोषण पोटली आपको तब तक दी जाएगी जब तक कि आपका टीबी का इलाज चल रहा है।

उन्होंने क्षय रोगियों को संबोधित करते हुए कहा – सभी नियमित रूप से दवा खाते रहें, नियमित रूप से दवा खाने से वह बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। साथ ही, अपने परिजनों की भी टीबी जांच अवश्य कराएं। उन्होंने क्षय रोगियों से निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह मिलने वाले पांच सौ रुपए की राशि के बारे में भी पूछा और अपना मोबाइल नंबर शेयर करते हुए कहा कि कोई समस्या होने पर वह सीधे उनसे बात करें। जिला क्षय रोग अधिकारी ने कहा कि गोद लिए गए क्षय रोगियों को सम्पूर्ण उपचार के साथ भावनात्मक सहयोग भी दिया जा रहा है। जरूरतमंद व आर्थिक रूप से कमजोर क्षय रोगियों को पोषण व भावनात्मक सहयोग प्रदान करने के लिए लोग आगे आएं।    

इस मौके पर निक्षय मित्र के रूप में आगे आये रामा मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूनम कुशवाहा ने बताया कि सरकार क्षय रोगियों के  लिए अनेक योजनाएं चला रही है है । हमने भी सरकार की इस मुहिम में शामिल होने का निर्णय  लिया। जिला क्षय रोग केंद्र पर जब हमें पता चला कि बहुत से ऐसे गरीब परिवार हैं जिन्हें टीबी की दवाएं तो जिला क्षय रोग केंद्र से मिल जाती हैं लेकिन वह  प्रोटीनयुक्त खाना खाने में असमर्थ है । इसलिए हमने ऐसे क्षय रोगियों को गोद लेने का निर्णय लिया । यह हमारा पहला प्रयास है, आगे भी हम और क्षय रोगियों को गोद लेंगे।

शुरुआती पहचान व उपचार से टीबी से मुक्ति : जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना ने कहा कि यदि टीबी की पहचान शुरुआती दिनों में हो जाए तो मरीज छह माह के सम्पूर्ण उपचार से ठीक हो जाता है। टीबी का इलाज अधूरा छोड़ने पर यह गंभीर रूप लेकर मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के रूप में सामने आती है। टीबी के मरीज ड्रग रेजिस्टेंट न हों इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला टीबी नियंत्रण इकाई मरीजों का नियमित फॉलोअप कर रही है। उन्होंने क्षय रोगियों से अपील करी कि जैसे आपको कहीं न कहीं से टीबी का संक्रमण मिला है  वैसे ही अब यह संक्रमण आपसे किसी दूसरे को ना पहुँचे I इसके लिये जरूरी है की अपने परिवार जनों की भी टीबी की जाँच करवायें और सभी को टीपीटी थेरेपी भी दिलाएं I

इस दौरान जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना सहित कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूनम कुशवाहा, मेडिकल प्रोफेसर डॉ आरपी गुप्ता, एसटीएस रश्मि प्रभा, नरेंद्र कुमार,  अभिषेक, डॉ गरिमा और क्षयरोग विभाग के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।